बैंकों में नकदी की अचानक कमी का कारण अचानक नहीं


देश के 10 राज्यों में नकद करेंसी की अचानक कमी ने अर्थ शास्त्रियों को हैरानी में डाल दिया ! किसी भी देश की अर्थ वव्यस्था में नकद करेंसी का बड़ा योगदान होता है ! भारत जैसे कृषि प्रधान देश में जहाँ कैशलेस इकॉनमी अभी दूर की कौड़ी लगती है , एटीएम में नकदी की कमी चिंता का विषय है ! हर कोई इसका कारण समझना चाहता है ! भारत सरकार के आर्थिक मामलों के सचिव एस सी गर्ग ने सरकार की और से बयान जारी कर के कहा है कि पूरे देश में हर महीने 20 हज़ार करोड़ करेंसी नोटों की मांग रहती है परन्तु पिछले कुछ दिनों में नोटों की मांग हैरानीजनक ढंग से बड़ी है ! अप्रैल के शुरुआती 12 -13 दिनों में ही 45 हज़ार करोड़ खपत हो चुके हैं !

सवाल यह है के आखिर कैश है कहाँ ? इसका कारण जानने से पहले हमें 2 साल पहले हुई नोटबंदी के दौरान बैंको में जमा हुए 16 लाख करोड़ कैश पर देना होगा ! सरकार के मुताबिक इस समय 18 लाख करोड़ के नए नोट बाजार में हैं ! रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने आज तक नोटबंदी के दौरान कितना कैश जमा हुआ , का खुलासा नहीं किया ! एक अनुमान के मुताबिक यह आंकड़ा 16 लाख करोड़ से ज्यादा हो सकता है ! अगर ऐसा है तो कैश की कमी स्वाभाविक है क्यों कि बाजार में आयी नयी करेंसी नोटबंदी के दौरान जमा हुयी पुरानी करेंसी से कम है ! सच्चाई यह है के आम लोगों के पास नोटबंदी के बाद हाथ में इतना कैश नहीं है जितना नोटबंदी से पहले था !

बैंकों में कैश की अचानक आई कमी का कारण अचानक नहीं है क्योंकि बैंको में जमा होने वाले कैश की बजाय निकाले जाने वाले कैश कि मात्रा काफी ज्यादा है ! अर्थ शास्त्रियों के मुताबिक सरकार का कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने से आज कंपनियां और सरकारी एजेंसियां अपना व्यापर बैंक क़े माध्यम से कर रहीं हैं ! किसान को आज अपनी फसल का मूल्य बैंक क़े माध्यम से ही मिलता है ! इसी तरीके से आम आदमी को अपनी तनख्वाह भी बैंक क़े माध्यम से मिलती है , जो कैशलेस अर्थवव्यस्था क़े लिए अच्छा है पर दिक्कत यह है कि आम लोगों ने अभी कैशलेस वव्यस्था को पूरी तरह से नहीं अपनाया है ! किसान की फसल का पैसा बैंक में आ रहा है पर वो इसको खर्च कैशलेस तरीके से न करके बैंक से पैसा निकाल कर करता है ! इसी तरीके से जिनकी सैलरी बैंक में आती है वो भी अपना खर्च कैशलेस तरीके से न करके बैंक से पैसा निकाल कर करते हैं ! इसका आसानी से अनुमान लगाने का तरीका है कि आप अपने बैंक खाते को देखें कि आपने पिछले 6 महीनो में कितना कैश बैंक में जमा करवाया है और कितना कैश निकलवाया है !

सीधी सी बात हैं कि बाजार में दोबारा से एक समानांतर अर्थ व्वयस्था पैदा हो गयी है जो बैंक की बजाय कैश लेनदेन ही करती हैं ! असलियत में आज नकद बैंक में जमा करवाने की बजाय निकाला ज्यादा जा रहा हैं !

सरकार की इनकम टैक्स विभाग की सख्ती और काले धन कि ऊपर 78 % टैक्स जैसे नए इनकम टैक्स कानून भी इसका एक कारण है ! आज 2 लाख रुपया भी कैश बैंक में जमा करवाने पर इनकम टैक्स नोटिस का आना एक आम बात है ! कई बार तो किसानों को भी सिर्फ 2 लाख कैश जमा करवाने पर इनकम टैक्स विभाग की तरफ से नोटिस मिलते हैं। विभाग की कार्यवाही से बचने के लिए गैरजरूरी कैश को बैंको में जमा करवाने क़े रुझान में कमी आना स्वाभिवक है !

मुझे लगता हैं कि PNB फ्रॉड , बैंको के बढ़ रहे खराब कर्जे जिसको NPA कहा जाता है और अगले साल कि आने वाले लोक सभा चुनावों का इस नकदी की कमी से सीधे तौर पर कोई लेना देना नहीं है !

नकदी की कमी से छुटकारा पाने के लिए नयी नकदी को छापना एक नए तरीके की समस्या को जन्म दे सकता है ! किसी भी अर्थ व्यवस्था में नयी नकदी का छपना मुद्रा पसार पर उल्ट असर दिखायेगा जिससे महंगाई जैसी समस्या से हमारी अर्थव्यवस्था को जूझना पड़ेगा !

अब सवाल ये है कि किया क्या जाये ? रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया को नोटबंदी क़े समय पर पुराने जमा हुए नोटों के आकड़ों का सही खुलासा अर्थ शास्त्रियों को अर्थवव्यस्था को सही ढंग से समझने का मौका देगा !

आज अर्थवव्यस्था के ऊपर सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि GST सिस्टम को असरदार तरीके से लागू करना ! GST सिस्टम बड़ी कंपनियों और व्यापारिओं ने तो अपना लिया है पर सच्चाई यह है कि छोटा और मध्यम वर्गीय व्यापारी आज भी कैश में ही काम करने को पहल देता है ! सरल GST कानून से छोटे और मध्यम वर्गीय व्यापारी को समानान्तर अर्थवव्यस्था से दूर ले जाने में सहायता मिलेगी और ज्यादा नकदी बैंकिंग सिस्टम में आनी शुरू होगी !

अभी तो रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया औसत से 5 गुना ज्यादा नए नोट छाप कर नकदी के संकट से उभर आएगा।

परन्तु यह इस समस्या का स्थायी हल कतई नहीं है!


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